Wednesday, 18 September 2019

SINGLE USE PLASTIC BREAKUP SONG IN HINDI I POLLUTION BREAKUP SONG IN HINDI @sunilagrahari

     SINGLE  USE PLASTIC BREAKUP SONG IN HINDI  - 

       SDG#16 

poem on pollution 


                    








NOTE- USE THE TUNE OF BOLLTWOOD RANVEER KAPOOR SONG 


सिंगल यूज़ प्लास्टिक के खातिर देसी कुल्हड़ तोड़ दिया 
मैंने छोड़ दिया उसे छोड़ दिया 
प्लास्टिक के प्रदुषण  ने उसका भाण्डा फोड़ दिया 
मैंने छोड़ दिया उसे छोड़ दिया 

सिंगल यूज़ प्लास्टिक ने वर्ल्ड स्मैशप कर  दिया 
पोल्लुशन से लाइफ़ का मेकअप कर दिया 
इसी लिए प्लास्टिक से मैंने ब्रेकअप कर लिया 
सिंगल यूज़ प्लास्टिक से मैंने ब्रेकअप कर लिया 


     तुमको हम  बताते है ये  कैसे कर लिया 
   तुम भी ये कर सकते हो जो मैंने कर  दिया 
 आज प्लास्टिक से मैंने तो  ब्रेकअप कर लिया
   डेली प्लास्टिक नीड से  ब्रेकअप कर दिया 

आने वाली पीढ़ी को हम प्लास्टिक में ना पैक करे 
थैले कपडे कागज़ के में सामान ले जाने आये है 
प्लास्टिक खुद कभी नस्ट न होती प्रकृति को क्षति पहुँचती है 
सकल जगत की मीठी छुरी हम बतलाने आये है 
RAP 
लुक ,बेबी ,मुझे लगता है जो भी मैंने किया वो  वैरी वैरी राइट है 
भूत काल को भूल जा अब तू आने वाला फ्यूचर वैरी वैरी ब्राइट है 
माइंड ना करना थोड़ा ज्यादा बोल दू क्यों की बन्दा  वैरी वैरी राइट है 







Wednesday, 24 July 2019

APAHIJ SHISTACHAR , अपाहिज शिष्टाचार

           

*APAHIJ SHISTACHAR STORYU  IN HINDI* 

       अपाहिज शिष्टाचार    

            यात्रा वृतांत  (सत्य घटना )
लोकल ट्रेन स्टेशन पे रुकी रोज़ की तरह , और आँखे तलाश रही थी मेरी बैठने की जगह ,
मै घुसा डिब्बे में  पिता जी के साथ , तभी एक बुज़ुर्ग ने आवाज़ दी मुझेहिला के हाथ ,
कहा ,आओ बेटा यहाँ बैठो बाबू जी के साथ .
वो डिब्बा था ख़ास अपाहिज और बीमार लोगो का ,मगर उम्मीद ,दर्द ,शांतिजैसे से भरे हौसलों  का ,
उसमे कोई महिला गर्भावस्था में,तो कोई बुज़ुर्ग ज़र्ज़र अवस्था में,जीवन की चाह से भरपूर
 ज्यादातर लोग दुखों से द्रवित बैठे थे. 
मैं भी जा रहा था कराने पिता जी का उपचार ,बुढ़ापे में उनके दिन बचे है अब थोड़े से चार ,
और हम सब की कोशिश है की जिए दिन हज़ार। मेरे पिता जी ऊपर से स्वस्थ मगर अंदर थे  कैंसर से ग्रसित,
बाकी बैठे लोग संतुष्ट है या असंतुष्ट, समझ नहीं पा रहा था मै था असमंजस में ,
क्यों की इंसानियत की नूर टपक रही थी इनके  सब के चहरे के नस नस में , 
लेकिन हाव भाव थे ऐसे , जियेंगे सदियों जैसे . 
इनमे से कुछ की ज़िन्दगी की शाम ढलने वाली है, लेकिन उन्हें ज़रा भी ना था मलाल ,
सब कर रहे थे एक दूजे का ख़याल , दूसरों के आँसू पोछने को निकल रहे थे कई  रुमाल ,
कौन है किसका सगा कौन  पराया कुछ पता ही नहीं चल रहा था ,ये बात थी कमाल ,
ये सब देख कर मै  कर रहा था उनके ज़िन्दादिली को मन ही मन सलाम,
यहाँ के माहौल आपसी भाई चारा , प्यार मुहब्बत, इंसानियत  से मेरी आँखें नम 
,ह्रदय करुण क्रंदन  कर रहा था  अचानक इन सब के बीच  
"टाटा मोरियल कैंसर अस्पताल आ गया ,
मैं उठा , पिता जी उठे और ....... "उठा मेरे मानस पटल पर  एक झकझोरता सा सवाल" ,
क्या होता जा रहा है आज कल हमारी आने वाली पीढ़ी में कुछ लोगों के सामजिक संवेदना को ? 
जिनको ,ख़ुदा ने बख्शी है पूरी नियामत ,घर परिवार से सुखी और शरीर से सलामत ,
वो क्यों  हो रहे है इंसानियत से दूर और स्वार्थी ? चूर है मस्ती में नहीं मतलब किसी की भी हो अर्थी ,
क्यों वो  लोग किसी की परवाह नहीं करते? उनका भी वख़्त आएगा क्यूँ नहीं डरते ?
क्यों नहीं बढ़ते हाथ एक अदद  ? किसी  की करने  को मदद ,
कब जागेगी सहानुभूति असहायों के लिए  ?
धन के नशे में चूरपढ़े लिखे अज्ञानी ,सभ्य समाज के वासी  ,
शायद ऐसे  लोगों का शिष्टाचार अपाहिज हो रहा है ,
ऐ मेरे  ख़ुदा मेरी आप से है दुआ ,उन बेगैरत लोगो को ,जिनको गुमाँ  है अपनी नियामत पर , 
उनको दुःख का एहसास ज़रूर कराना उनकी  परिभाषित इंसानियत पर ,
शायद ठीक हो जाये उन लोगो का अपाहिज शिष्टाचार। 
मेरे पिता जी तो स्वस्थ हो गए लेकिन इस दुनिया रुपी ट्रेन के डिब्बे  मेरी यात्रा जारी है ,मुझे इंतज़ार है उन अपाहिज शिष्टाचार वालों के ठीक होने का। llll



सुनिल अग्रहरि 
एल्कॉन इंटरनेशनल स्कूल 
मयूर विहार - फेस -१ 
नई दिल्ली -९१ 
मोबाइल - ७०११२९०१६१ 

Tuesday, 29 January 2019

Math's song , ganit ke dohey , art integration song for math, त्रिभुज के दोहे -गीत गणित @sunil agrahari






*****गीत गणित *****

हिसाब किताब घरेलू काम हो या , अर्थव्यवस्था की बात 
गणित बिना न पूर्ण हो  , जीवन की हर बात। 

जोड़ घटाना गुना भाग , वर्ग  मूल  घन मूल ,
वेद  व्यास के पुराण में लिख है इसका  मूल। 

आर्यभट्ट वराहमिहिर , जैसे पाड़ीनी  बौधायन ,
विश्वप्रसिद्ध गणितज्ञ भारत के ब्रम्हगुप्त रामानुजन। 

अलजेब्रा ट्रीगोनामेट्रिक  , पाई  का इन्नोवेशन ,
आर्यभट्ट    का    मैथ   में     है  ग्रेट  कंट्रीब्यूशन। 

नंबर थियोरी , इनफाइनाइट सीरीज़ , एंड कन्टीन्यूड फ्रैक्शन,
रामनुजन मेड एक्सट्राऑर्डनरी , मॉक थीटा फ्रिकशन। 

तीन सीधी लाइन लीजिये , तीनो के सिरे दो मिलाय ,
मिलने से जो आकृति बने , वो त्रिभुज कहलाये।

हर ट्रैंगल में तीन एंगल है , हिंदी में कहते है कोण,
जब तीनों एंगल मिले तो 180 डिग्री आता जोड़। 

देवा रे देवा त्रि देवा , ब्रम्हा  विष्णु  महेश ,
ट्रैंगल ट्रैंगल जोड़ कर , बनता है ब्रिज का  बेस।  

Triangle song त्रिभुज  के दोहे