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Wednesday, 18 May 2016

Motivational poem, FAITH , FARK POEM BY SUNIL AGARAHARI - फ़र्क

       

******फ़र्क******

बीज में दम  हो तो ,पौधा ज़रूर निकलता है ,
फिर ज़मी बंज़र भी हो तो क्या फ़र्क  पड़ता है ,

आफ़ताब रोज़ दुनियां में कहीं न निकलता है  ,
फिर मुर्गा बांग  दे या नादे , क्या फर पड़ता है ,

हिम्मत से बढ़ो  ख़ुदा ज़रूर मदद करता है ,
फिर मुक़द्दर साथ ना दे ,क्या फ़र्क पड़ता है ,

इन्सां वही जो इंसानियत की इबादत करता है ,
फिर हो  किसी भी धर्म का, क्या फ़र्क पड़ता है ,

ठेस लगती  है कहीं भी तो ,दर्द ज़रूर होता है ,
फिर अमीर हो या गरीब ,क्या फ़र्क पड़ता है ,
  
हर रिश्ते को निभाने में, क़ुर्बान होना पड़ता है ,
फिर अपना हो या पराया , क्या फ़र्क पड़ता है , 

२४/०४/ २०१६ 


Friday, 16 January 2015

poem on dog's faith वफ़ादारी (कुत्ता ) - hindi -wafadari

             






 ……वफ़ादारी (कुत्ता )-१५/०१/२०१५/......





सूनी राहों में न जाने किसे देख, चिल्लाता है रात भर ,
उसकी वजह से  ही तो  चैन से  सोते  है  परिवार  भर ,
प्यार से जब भी उसे देखा , लिपट जाता है  पैरों से 
लेकिन दोस्ती नहीं करता, कभी वो झटपट गैरों से ,
सेना से आम आदमी तक ,होती है  उसकी  पूछ  ,
नहीं वो छोड़ता कभी साथ , चाहे नीच हो या ऊँच ,
परहेज़ नहीं कुछ खाने से ,चाहे जूठा हो या सुच्चा ,
मिले फेंक के चाहे या बर्तन में, हर भोजन है अच्छा ,
कोई घूमे गाड़ी पे , कोई सड़क पे आवारा ,
किसी ने प्यार से चूमा , किसी ने ईंट से मारा ,
सब से ज्यादा मौत सड़को पे इनकी ही होती है 
कहानी और फिल्मो में चर्चा , इनकी भी होती है 
हिफाज़त और वफादारी गुण इनके है पैदाइशी,
लेकिन लोगो का है व्यवहार इनसे जैसे कोई वहशी,
नहीं आया इनमे कोई बदलाव , सदियों से आज तलक , 
इन्सां  ने  ना सीखा इनसे कुछ , बदल जाता है झपकते पलक,
हमारी दुनियां में इनकी , नहीं  है भागीदारी कम, 
वफ़ादारी इनसे सीखें   ,निभाएं ज़िम्मेदार हम   ………