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Sunday, 21 September 2014

Poem on train journey ,अपाहिज शिष्टाचार hindi kavita - true poem on Mumbai local train , very inspiring .



  




***अपाहिज शिष्टाचार ** २२/०९/२०१४ 

      यात्रा वृतांत  (सत्य घटना ) 
लोकल ट्रेन स्टेशन पे  रुकी रोज़ की तरह ,
आँखे तलाश रही थी मेरी , बैठने की जगह ,
मै घुसा डिब्बे में  पिता जी के साथ , 
एक बुज़ुर्ग ने आवाज़ दी मुझे, हिला के हाथ ,
कहा ,आओ बेटा यहाँ बैठो बाबू जी के साथ ,
वो डिब्बा था ख़ास अपाहिज और बीमार लोगो का ,
जैसे उम्मीद ,दर्द ,शांति, से भरे हौसलों  का ,
कोई महिला गर्भावस्था में,
तो कोई बुज़ुर्ग ज़र्ज़र अवस्था में,
जीवन की चाह से भरपूर 
ज्यादातर लोग दुखों से द्रवित ,
मेरे पिता जी ऊपर से स्वस्थ 
मगर अंदर थे  कैंसर से ग्रसित,
ये सब लोग संतुष्ट है या असंतुष्ट, मै  था असमंजस में ,
क्यों की इंसानियत की नूर टपक रही थी 
इनके  सब के चहरे के नस नस में , 
लेकिन हाव भाव थे ऐसे , जियेंगे सदियों जैसे ,
इनकी ज़िन्दगी की शाम ढलने वाली है
ना ज़रा भी था मलाल ,
सब कर रहे थे एक दूजे का ख़याल ,
दूजो के आँसू पोछने को निकल रहे थे कई  रुमाल ,
मै  कर रहा था उनके ज़िन्दादिली को मन ही मन सलाम,

यहाँ के माहौल से मेरी आँखें नम 

ह्रदय करुण क्रंदन  कर रहा था  ,
"टाटा मोरियल कैंसर अस्पताल आने वाला था 
मैं उठा , पिता जी उठे और ....... 
उठा मेरे मानस पटल पर  
एक झकझोरता सा सवाल 
क्या होता जा रहा है हमारी सामजिक संवेदनाओं  को ?
ख़ुदा ने जिनको बख्शी है पूरी नियामत ,
घर, परिवार से सुखी और शरीर से सलामत ,
वो क्यों  हो रहे है इंसानियत से दूर और स्वार्थी ?
चूर है मस्ती में नहीं मतलब किसी की भी हो अर्थी ,
क्यों  लोग किसी की परवाह नहीं करते?
उनका भी वख़्त  आएगा क्यूँ नहीं डरते ?
क्यों नहीं बढ़ते हाथ एक अदद  ?
किसी  की करने  को मदद ,
कब जागेगी सहानुभूति असहायों के लिए  ?
धन के नशे में चूर, पढ़े लिखे अज्ञानी ,सभ्य समाज के वासी  ,
शायद इन सब का शिष्टाचार अपाहिज हो रहा है 
ओ मेरे  ख़ुदा मेरी आप से है दुआ 
जिनको गुमाँ  है अपनी नियामत पर , 
उनको दुःख का एहसास ज़रूर कराना क़यामत पर , 
शायद ठीक हो जाये हमारा अपाहिज शिष्टाचार……… 
शायद ठीक हो जाये हमारा अपाहिज शिष्टाचार……… ……………

नोट -----

ये  घटना काल्पनिक नहीं मेरे साथ घटित  हुई २००८  में  , किसी को ठेस पहुंची हो तो माफ़ी चाहता हूँ , मेरी हार्दिक गुज़ारिश है कृपया मेरे भावों को समझने की कोशिश ज़रूर करें  .  ) धन्यवाद। .... 


रचनात्मक प्रतिभा शिक्षक सम्मान