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Tuesday, 4 May 2021

corona mahamari poem , kroor corona hindi poem , motivational mahamari poem @sunilagrahari

 


                                                                






ऐ क्रूर कोरोना सुन ले ज़रा ,तू कितने इंसा मारेगा 

हम आदम की औलादे है ,तू ख़त्म नहीं कर पायेगा। 


बूढ़े बच्चे और जवां ,सब को तू हर पल  मार रहा 

अरे घोंट मेरा दम कितने भी ,ना आस ख़तम कर पायेगा। 


सदियों से ज़ुल्म मनुष्यों पर ,हर तरह से होते आया है 

अरे तूभी कर ले अपने सितम ,भरम तेरा मिट जाएगा। 


गद्दार है जो तेरे साथ खड़े,तू उनका भी तो सगा नही 

भस्मासुर की औलाद है तू,इंसान ही तुझे मिटाएगा ।


कुछ पल को तू मुझे हरा सकता ,दुनियाँ शमशान बना सकता 

पर इंसा वीर एक योद्धा है ,तू इसको जीत ना पायेगा। 


धरती पर इंसा का वज़ूद.ना मिटा था ,ना मिटने पायेगा 

हम तुझको तुझसे मारेंगें ( वैक्सीन ),मेरी चाल तू समझ न पायेगा। 


माना की आज अंधेरा है,संगी साथी सब बिछड़ रहे

इंसान उम्मीद का दीपक है,उस लौ में तू भस्म हो जाएगा ।


लालच गिद्ध कालाबाज़ारी का,वायरस कब मारा जाएगा ?

गद्दारी से जीत का टीका,जाने कब इंसा बनाएगा ।

Monday, 18 May 2015

POEM ON NEWS PAPER , AKHBAAR HINDI POEM ON NEWS PAPER BY SUNIL AGRAHARI

…अख़बार ....१८/०५/२०१५ 

मैं हूँ अख़बार ,मैं हूँ अख़बार ,
सब को सुबह रहता है मेरा इंतज़ार ,
मेरे बिन चाय का ज़ायका है बेकार,
मैं हूँ नाचीज़ लोग पढ़ते बार बार 

ज़मी के अंदर या ज़मी के बाहर ,
आसमां के अंदर या आसमां के बाहर ,
समुन्दर के अंदर समुन्दर के बाहर  ,
जंगल से तेंदुआ कैसे आया बाहर ,
मुझमे है छपती बाते हज़ार,
 मैं हूँ अख़बार ……

कहीं कोई भागा , गया कोई पकड़ा ,
ग़रीब और भूखे को चोर कह के पकड़ा ,
बिना बात के धक्का मुक्की और झगड़ा ,
घूसखोर साहब के घर छापा तगड़ा ,
खट्टी मीठी खबरों का मै  हूँ बाजार ,
 मैं हूँ अख़बार ……

कहाँ आई बाढ़ ,कौन  बह गया,
कहाँ आया भूकम्प ,कौन  दब गया।,
बरसात और सूखे से कौन मर गया ,
बिल्ली की गोद  में चूहा सो गया ,
सुख दुःख की खबरों का मै हूँ अम्बार , 
मैं हूँ अख़बार …… 

इंसान बिक गया मिट्टी के भाव में ,
मिट्टी बिक गई सोने के भाव में ,
जीरा बिक गया  हीरे के भाव में ,
पेट्रोल जल गया मंदी के भाव में ,
खबर पढ़ के मेरी, होती है टकरार ,
 मैं हूँ अख़बार ……

सत्ता विपक्ष में हूँ दोनों  का प्यारा ,
सरकारी ठेकों का मै हूँ पिटारा ,
विज्ञापन की दुनियाँ का मै हूँ सहारा ,
खबर सच छपे तो हिल गई सरकार ,
मैं हूँ अख़बार ……


फिल्मो के हीरो  हीरोइन की सूरत ,
चटपटी खबरें भी लोगों की ज़रूरत ,
फैशन के दुनियाँ की भूतों की मूरत ,
फोटो तो ऐसी की शकल है न सीरत ,
मनोरंजन की दुनियां से कराता सरोकार ,
मैं हूँ अख़बार ……


कहाँ कौन रूठा कहाँ कौन छूटा ,
गरीबों का खाना अमीरों का जूठा,
नेता को पीटा सर किसका फूटा  ,
सरकारी अफसर ठग फर्जी झूठा ,
खबरों में बिक जाता है गवाँर ,
मैं हूँ अख़बार ……

सोने चांदी का भाव चढ़ा कितना टूटा ,

कौन सी कंपनी ने ग्राहकों को लूटा ,
नकली माल बेच  जेल से कौन छूटा ,
ज़मीन किसने बेचा कर के वादा झूठा ,
खबर बिक रहे बिक रहा है बाजार 

मैं हूँ अख़बार ……मैं हूँ अख़बार ……

मैं हूँ अख़बार ……मैं हूँ अख़बार ……







Thursday, 19 July 2012

Dua hindi poem by sunil agrahari










Published in Akrosh magazine Mauritius APRIL 22

*******दुआ ******

सागर  की  लहरो ने  धोका दिया   है 
रेतों  के  तन्हां  में   , सीप  को  छोड़ा  है। 

लहरों  की  बूंदों  को  मोती  बनाया ,
सिला  सीप  को  नेकी  का  मिला  है। 

फरेबी   लहर ने  सपने  दिखा  कर  ,          
गहराई   से  नाता  ,सीप  का  तोड़ा  है। 

 फिर  भी  दुआ  दे  रहा  है   ,लहर  को,  
 खुद   को  खुदा से   सीप  ने जोड़ा    है। 

                                     सुनील अग्रहरि