Thursday, 22 August 2013

टीचर्स आरती - hindi funny poem on teachers













त्व मेव   n t t ,  p r  t त्वमेव ,
त्वमेव    t  g  t ,  p g t    त्वमेव ,
त्वमेव   dr  ,   phd    त्वमेव
त्वमेव  brilliant   ,  फिसड्डी   त्वमेव

ॐ जय प्रभु , गुरु देवा। ...  2
जो तुम्हारी करे सेवा  - २
वो खाए  मेवा। …… ॐ जय। ……।

टीचिंग तुम्हारा talent
जग सारा जाने। …।प्रभु जग सारा जाने
फिर   भी  तुम्हारी  कोई x २
बात नहीं माने। ……। ॐ जय। ………


गुरु है अद्भुत प्राणी ,
वो gate duty  करे,…।प्रभु तुम   gate duty  करे
तुम हो  t  o d  में  पारंगत x २
तुम ही बस ड्यूटी करे।  ॐ जय। ………


तुम हो एक  क्लास टीचर 
तुम सब्जेक्ट टीचर ,…।प्रभु तुम  सब्जेक्ट टीचर
फिर भी  इज्ज़त जैसे  x २ 
कोई हो कैरी कैचर  ……। ॐ जय। ………


सब से ज्यदा तुम पर 
लोग रिसर्च करे …।प्रभु तुमपे  रिसर्च करे 
बड़े बड़े ज्ञानी आ कर 
तुम पर वर्कशॉप करे  ……। ॐ जय। ………


हरदम भागते रहते 
फिर भी कभी न थके ।प्रभु तुम कभी  न थके 
पैसठ  उम्र हो चाहे x २ 
फिर भी पैतीस लगे   ……। ॐ जय। ………


चाहे जैसी हो वर्कशॉप
हंसी ख़ुशी attend  करे  ।प्रभु  ख़ुशी से  attend  करे
बाहर जाकर चाहे  x २
कोसे काना फूसी करे  ……। ॐ जय। ………


जो काम कभी न किया हो
उसे भी बखूबी करे , प्रभु  उसे भी बखूबी करे
घर में चाहे आता  हुवा  x २
काम को मन करे   ……। ॐ जय। ………


mgrm   software
तुमसे घबराता , प्रभु तुमसे घबराता
जैसे कार्ड  enter    ये करते  x २
वो hang  हो जाता  ……। ॐ जय। ………


कष्ट तुम्हे तब होवे
जब छुट्टी कोई sunday  को पड़े , जब छुट्टी कोई sunday  को पड़े,
second Saturday साढ़े साती लगता  x २
जब उस दिन आना पड़े   ……। ॐ जय। ………



वो प्राणी है अभागा
जिसपे तेरी कृपा न पड़े , प्रभु जिसपे तेरी कृपा न पड़े,
तेरी ही अच्छी शिक्छा से x २
हर कोई आगे बड़े ……। ॐ जय। ………




Deshpremi kalyugi ,Poem on politics corruption and leaders poem , ,कलयुगी देश प्रेमी हिंदी कविता,

              










देश प्रेमी कलयुगी नेता तुझे शत  शत नमन 
देश की सेवा के खातिर कर चुके कितने गबन ,

जीते जिस दिन से चुनाव ,चाल टेढ़ी हो गई ,
खाल पतली थी जो पहले ,अब वो मोटी हो गई  

तुम सियासत का कभी , मौका नहीं हो चूकते ,
   धर्म को तरबूज़  जैसे ,काटते और  बांटते ,

काले धन के तुम हो स्वामी, श्वेत वस्त्र धारण करो ,
लूट कर जनता का पैसा , जेब खानदान  की भरो ,

जब भी सोचा है तो सोचा , सिर्फ अपना ही  भला ,
ढीठ और बेदर्द बन कर, दबाते जनता का गला ,

कोई चाहे मर रहा , तुम अपनी रोटी सेकते ,
मौलवी पंडित लड़ाकर ,चैन से खुद बैठते ,

तुम कुकुरमुत्ते से प्राणी हर जगह उग जाते हो ,
पार्टी का रंग कैसा भी हो ,उसमे तुम मिल जाते हो ,

गणित आप की चमत्कारी , दो  दूनी  होता है छह ,
   भ्र्स्टाचारी दुराचारी , चमचे है आगे पीछे ,

दुनियां को ठगने की तुममे , है गज़ब प्रतिभा भरी ,
खेत में ग़र सूखी घास हो ,तुमको दिखती है हरी ,

रूप अनंत महिमा अनंत , गाथा अनंत कितना कहूं ,
देश की जनता कहे के ,अब तुम्हे कितना सहूँ ,

जैसी करनी है तुम्हारी , तुम भी ना बच पाओगे 
स्वर्ग तो तुम जी चुके हो , नर्क में अब जाओगे। 











अच्छा हुवा - कविता , one side love hindi poem

    

कितना अच्छा हुवा ,कुछ ना तुमसे कहा
मन में डर है कही खो ना  दूँ  तुमको मै
सामने जब मेरे रोज़ तुम  आते हो
सोचता हूँ बयां कर दूँ हाले दिल मै

क्या ये है गुनाह ? कह नहीं पाता  मै ,
या ये है गुनाह के कुछ न कह सका
जो है मुझको पसन्द ,जो मै  करता हूँ
वो है तुमको पसन्द  ,तुम भी वो करते हो
फिर भी न जाने क्यूँ डरता हूँ कहने से
जब की सोचते है हम एक, दूजे की तरह ,
तू मेरा है भी नहीं ,फिर भी खोने का ग़म
कैसा है रे ये दिल तुझको अपना लिया ,
कितना अच्छा हुवा  ………। 
अब मिलोगी तो  तुमसे   ये कह दूंगा ,
जब मिलोगी तुम हमसे ,मै  वो कह दूंगा
इस तरह के ख्याल आते ही रहते है
आप के नाम से सवाल उठाते ही रहते है
 हम आप के  हँसी मुस्कराहट से,
अपने दिल को यूँ ही बहला लेते है
सोचता हूँ की एक दिन तुम समझ जाओगी
शायद कह दोगे तुम जो मुझे लगता है
मगर सोचते सोचते बरसों हो गए
जैसे हो परसों की बात हो  यूँ लगता है
"तुमको पाना मेरा मकसद  नहीं
मै  तो तुमको सिर्फ जीना चाहता  हूँ ",
अच्छा ही हुवा तुमने भी कुछ न कहा
इस उहा पोह में ज़िन्दगी कट जायेगी
कितना अच्छा हुवा कुछ न तुमसे कहा ………
                                                           सुनील अग्रहरि


  

Thursday, 9 May 2013

Dharm ki patni hindi funny vyangya kavita , धरम की पत्नी-कविता -patni kavita vyangy, hindi funny poem on wife's

सुन सुन मेरी सास री ,
अब मेरा निकला दम,
कह के भेजा फुलझड़ी ,
निकला वो एटम बम ,

उससे कैसे निभाऊ
उसको समझ न पाया ,
मै बदला उसके खातिर ,
पर उसे बदल न पाया ,

सुन कर उसकी बात
मुझे जब गुस्सा आता ,
कहती है न शोर करो
 मेरा दिल घबराता ,


कहती है न शोर करो
shopping पर जाना है
exchange offer में आज
बदल कर कुछ  लाना है ,


जानू , ए  जी सुनते हो
कह के प्यार जताती
मतलब पूरा होते  ही
राशन पानी ले चढ़  जाती ,

कसम से मै  तो हिल जाता  हूँ ,
रूप देख कर ,
गिरगिट भी क्या  रंग बदलेगा
mood देख कर ,


hidden talent की खान है
मेरी बीवी भाई ,
पता नहीं कुछ भी लेकिन
बहस पूरी है भाई ,


am pm  time  से
उसका नहीं है लफड़ा
जब जी चाहे उसका
 मुझसे करती झगड़ा


boss के  room   में  जब
मेरा phone  बजता है भाई ,
डर  जाता  हूँ phone पे
बीवी प्रकट  तो नहीं हो आई ,

boss  मुझे कहते है ज़रा
अपना project  तो समझाना ,
उस समय   बीवी phone पे  कहती है
5 रूपए की दही ले आना ,

5 रूपए की दही ले आना
आज कढ़ी खानी है ,
घर आना जल्दी तुम ,
market से दाल बड़ी लानी है ,

दाल बड़ी लानी है घर
कल आएगा भाई
छूट गई है  नौकरी उसकी
अब यही रहेगा भाई ,

बस हो गया  कल्याण
मेरा घर आया साला ,
करो उसका सम्मान
जैसे अफसर हो आला ,

पाँव उठा कर देती
कहती पैर दबाओ
वर्ना ब्यूटी पार्लर से
घर तक रिक्शा चलवाओ ,

अगर सुखी जीवन
जीना चाहो तुम दोस्त
बन जाओ बोवी  के
घर  जाकर  host ,

कहो के beautiful है
मेरे साला साली,सुन कर
बीवी हो जाएगी गुलाब
चाहे हो    जामुन काली ,

कहते है .....................

शादी बिन जीवन नहीं ,
जीवन नहीं बिन शादी ,
जान बूझ कर होश हवास में
करनी पड़ती है  बर्बादी ,


नोक झोंक कर  लड़ते रहते ,
एक ही  छत के नीचे ,
फिर भी  नही वो रह पाते है
एक दूसरे से आँखे मीचे,








Sunday, 5 May 2013

abhi to ye angadai hindi geet अभी तो ये अंगड़ाई - motivational song , inspiring song by sunil agrahari

                       

come on come on , lets move your  body 
come on come on,  now shake your  body 
come on come on, now  run  your body 
we  will  win the game , ye ye shake  it 

अभी तो ये अंगड़ाई है ,मन में आस जगाई  है ,
मुश्किलें चाहे जीतनी  हों ,हमने राह बनाई है ,


चाहे आंधी हो ,चाहे तूफान हो ,
मेरी चाहत को वो न उड़ा पायेगा ,
चाहे राहों में कांटे हो बिखरे मगर ,
मेरे कदमो को वो न डिगा  पाएगा ,
अभी तो ये अंगड़ाई है ...................................


come on come on , lets move your  body 
come on come on,  now shake your  body 
come on come on, now  run  your body 
we  will  win the game , ye ye shake  it 



 इस जहाँ में अँधेरा  कहीं पर न हो ,
चल पड़े है मशालों को ले कर के हम
अपने वादों से पीछे हम हटते नहीं
कह दिया हमने जो वो निभाते है हम
अभी तो ये अंगड़ाई है ...................................


come on come on , lets move your  body 
come on come on,  now shake your  body 
come on come on, now  run  your body 
we  will  win the game , ye ye shake  it 


आगे बढ़ कर के पीछे हम हटते ,
खाली  बातो से हम पेट भरते  नहीं,
हौसला है बुलंद ,जीत जायेगे हम,,
जीत मंजिल से पहले हम रुकते नहीं ,
अभी तो ये अंगड़ाई है ...................................


come on come on , lets move your  body 
come on come on,  now shake your  body 
come on come on, now  run  your body 
we  will  win the game , ye ye shake  it 



Friday, 3 May 2013

पंगा न लेना - motivational song , young generation song , sunil agrahari hindi poem

 

                                                             
  पंगा न लेना ,प् प्  पंगा न लेना
  पंगा न लेना,प् प् पंगा न लेना ....................5 

काम का तेरे कद हो ऊंचा लोग कहे क्या hight  है
काम करो computer  जैसे ,speed mega  bite  है 
हवा का सीना चीर के   ऊंचा ,उड़ाते जैसे kite है
देता हूँ  performance ऐसी ,सब की हवा tight है ,
पंगा न लेना ,प् प्  पंगा न लेना
,पंगा न लेना,प् प् पंगा न लेना ........................5 


problem को  कुछ भी न समझते 
सीधा सा funda अपनाते 
श्रीमान महोदय कह कर 
प्यार से उसको पास बुलाते 
हाथ पकड़ ले जाते side  
पर उससे नहीं करते fight 
problem  का  solution दे कर 
कर देते है उसको  hide ,
पंगा न लेना ,प् प्  पंगा न लेना
पंगा न लेना,प् प् पंगा न लेना   ...................5 


काम करो भाई  day n  night 
you will  get your  future bright 
name  fame मिल जायेगा 
but  keep  your mood  very  light ,
use करो system  को ऐसे 
लोग कहे हमे कर दो guide ,
आगे पीछे दुनिया सारी 
कहेगी तुमको very right 
पंगा न लेना ,प् प्  पंगा न लेना
पंगा न लेना,प् प् पंगा न लेना  .............................5 


EVERYTHING IS POSSIBLE song , motivatinal song , inspiring hindi song sunil agrahari

                                           

EVERYTHING IS POSSIBLE  ,आज नहीं तो कल
you will win we will win , कदम जमा कर चल
we will make  history ,we will do miracle,

EVERYTHING IS POSSIBLE  ,आज नहीं तो कल
you will win we will win , कदम जमा कर चल .......................


पत्थर है चट्टनो के ,फौलादी इरादे
मिटटी चाहे बंज़र हो हम फसल उगा  दे ....................2
we will make  history ,we will do miracle,

हम जहाँ पर जाते है ,बन के ख़ुशी छा  जाते है
हर मुश्किल को रोंद कर हम आगे बढ़  जाते है ... 2 
we will make  history, we will do miracle,


दिल में ज़ज्बा जीत का सच का थामे दामन
किस्मत से लड़ जाते है ,जीत के लेते ही दम ...2 
we will make  history, we will do miracle,


खुशियों पे हक सब का है ,सब के घर हों रौशन 
यही हमारी कोशिश है यही हमारा passion  ...2 
we will make  history ,we will do miracle,





  

Tuesday, 26 March 2013

MIHU ngo - anthem MAY I HELP YOU THEME SONG , motivational inspiring song sunil agrahari

                        


मे आई हेल्प यू है नाम हमारा ,
मिहू बनेगा सब का सहारा ,
आओ मिल कर साथ चले ,
हर मुश्किल को आसन करे ,
मे आई हेल्प यू है नाम हमारा .....................

ऐसी आहुति करे हवन में 
बांटेगे खुशियाँ सब के जीवन में 
उम्मीद और आशा जगाओ मन में 
कश्ती हमारी चले पवन में 
आशा की तुम , किरण बनो 
उम्मीद की  लौ  , रौशन करो 
मे आई हेल्प यू है नाम हमारा ....................


कारवाँ अपना अब ना  रुकेगा 
मंजिल पे आके अब दम ये लेगा 
आओ करे हम इबादत सच्ची 
जीवन में कर ले हम कुछ बात अच्छी 
आओ करे मिल कर करे आगाज़ ,
बुलंद करे सब की आवाज़ 
मे आई हेल्प यू है नाम हमारा ...................



Tuesday, 19 March 2013

Aam aadmi hindi kavita ,आम आदमी - mango poem , poem on common man , aam ki kavita

जानकारी काल पत्रिका जुलाई 2023 में प्रकाशित 

*आम - आदमी*
आम आदमी है ,या आदमी है आम,
ये कैसे पहचान हो की ,एक आदमी है आम,
जैसे 'आम ' की जातियां होती है भिन्न भिन्न ,
वैसे ही 'आम आदमी ' होता है छिन्न भिन्न ,
पका आम ऊपर से होता है एक दम पीला ,
आती है मस्त खुशबू ,अन्दर से गीला ,
आम आदमी भी दिखाता है
अजब गजब लीला, 
ऊपर से वो सख्त ,लेकिन अन्दर से ढीला ,
 
मीठा आम होता है कई बार हरा ,
गुठली छिलका पूरा रेशों से भरा ,
वैसे ही स्वस्थ आम आदमी दीखता है छरहरा ,
लेकिन अंदर से होता है वो एकदम डरा ,
मुसीबतों के रेशो से होता है पूरा भरा ,
सिकुड़े आम जैसे होता है अधमरा ,
आम आदमी को दुनियां चूसती है 
आम की तरह ,
आम आदमी को निचोड़ कर 
फेंकती है गुठली की तरह ,
वोटर भी आम आदमी है
कच्चे आम की तरह ,
नेता अपने वादे से पकाता है
कार्बाइड की तरह ,
नेताओं की भूख मिटती नहीं है 
आम आदमी को खा कर ,
तभी तो आम आदमी को रखता है
पोस्टरों में सजा कर ,
    
नेता सोचता है .....
बनाऊं इसका अचार या खा जाऊं पका कर,
या बनाऊं इसकी चटनी 
पी जाऊं आम पाना बना कर ,
थोडा वक्त मिल जाये तो 
काट छील कर खाता है ,
और समय कम होतो 
चलते चलते चूस जाता है ,
और चूसता भी है कितने 
एंगल बदल बदल कर ,
ऊपर से ,नीचे से, दाए बांये से खींच कर ,
जब तक की गुठली
आम आदमी की खोपड़ी सी गंजी न हो जाये ,
और ये विभत्स रूप देख कर
छिलका भी सिहर जाये ,
ये हालत होती है आम आदमी की 
जब वो हफ्ते भर में खत्म होता है 

इन्तहां तब हो जाती है ,जब आम आदमी 
आम के आचार की तरह डिब्बे में 
सालों साल बंद होता है ,
जब बॉस चाहे तो वो प्लेट में पड़ा होता है ,
कई बार तो वो "नाचीज़ चमचे" जैसे 
चावल औए पापड़ के नीचे दबा होता है ,
चटोरों की तरह बॉस खाने के बीच में 
चटकारे मार कर चाट चाट खाता है ,
चाटते हुवे फोन पे बीवी से बाते करता है ,
मसरूफ हो जाता है इतना ..
की पहले तो रेशा नोच कहता है , 
फिर गुस्सा आ जाये किसी पर तो
गुठली कूच कूच कर चबा जाता है ,
आम जैसे आदमी का तो 
वजूद ही ख़त्म हो जाता है,
कई बार तो आम आदमी बन जाता है खटाई,
नौकरशाही में फसा रहता है जैसे स्टैंड बाई ,
नौकरी पाने से रीटाएरमेंट तक जूते घिसता है,
पेंशन पाने के लिए वो अमचुर सा पिसता है,
मर मर के गर्मी में लगाता है कूलर या ए.सी.,
मैंगो जूस बन जाता है 
बिल भर के ऐसी तैसी, 
पट्रोल की प्राइस से घिस कट छिल के 
बन जाता है मुरब्बा ,
इसको मैनेज करने में याद आते हैं 
उसको अब्बा ,
बचते बचाते सब से जब सामने आती है पत्नी, 
वो भी आम आदमी की 
बनती है तबियत से चटनी ,
टाइम कम हो तो चटनी 
मिक्सी में पीसी जाती है ,
गर मन चटपटा हो तो 
सिलबट्टे पे कुटी जाती है ,
हांय रे आम आदमी , आम की तरह ,
न राजा होगा आम आदमी ,
कभी आम की तरह ,
जो गलती से बैठा आम आदमी, 
ताज़े तख़्त पर ,
कत्ले आम होगा आम आदमी मालिक की प्लेट पर ,

तभी तो सरकारे करती है ऐलान .........l
आम आदमी, का सब पे अधिकार है
जब की सारे अधिकार बिलकुल निराधार है ,
वो सारे अधिकार सूख कर
बन गए है आम पापड़ ,
कोशिश करो अधिकार लेने की
तो मिलता है झापड़ ,
बाते तो बहोत साऱी है बस कहता हूँ इतना ,
आम आदमी का अधिकार है
देखे कोरा सपना,
        
बस आम को खाने लिए देना पड़ता दाम है 
और आम आदमी तो पूरी तरह बेदाम है ...
ज्यादा कुछ करे तो सड़े आम सा,
हो जाता बदनाम है ....
हाय राम, है विडंम्बना , है राम में भी आम
यही आम आदमी राम को, चढ़ाता है आम
यही वक्त होता है , जब ख़ास होता है आम
आम तो आम है ,
थोडा उसमे खटास और मिठास है ,
आम आदमी के पास तो
सिर्फ खट्टी मीठी आस है ,
हाथो में प्रसाद लेकर करता है दुआये
अगले जनम में मुझको,
न आम आदमी बनाये ....३


Monday, 11 March 2013

Ishqu इश्क़ -कविता , प्यार , मुहब्बत , चाहत ,प्रेम , poem on contribution of love in life by sunil agrahari

        









                        


अपने जैसे चाहा बनाना उसे ,
बन गए उसके जैसे, पता न चला ,
डरते थे मौत से, के  आ न जाये कही ,
मर गए इश्क़  से , और पता न चला


अँधा इश्क है, या, इन्सा अँधा होता है ,

कैसी गफलत है ,अब तक पता न चला ,
मर्ज़ है या ये लत ,अब तलक है  बहस,
लोग करते है, या हो जाता है ,पता न चला ,


इश्क का उम्र से ,कोई लेना देना नहीं ,

उम्र बचपन है या पचपन, पता न चला ,
बचपना, उम्र पचपन में करने लगे वो ,
चर्चा -ए -आम होता है, पता न चला,

इश्क तक ठीक था ,शादी तक हो गई ,

ये दुर्घटना कब हुई  ,ये पता न चला ,
इश्क एकतरफा  हो, तो खतरनाक है ,
बन्दा लुटता रहा  और   ,  पता न चला ,


टूटा जब इश्क से ,तब  ये आई समझ ,

बन्दा  था काम का अब तक ,पता न चला ,
जीने के सलीके से, मै  वाकिफ न था ,
इश्क ने  सिखा दिया, और  पता  न चला


इश्क से पहले मै, आलसी था बहोत ,

अब घड़ी बन गया  हूँ ,पता न चला ,
सोते से जाग जाता हूँ, उसके लिए
 कब सुबह हो गई , ये  पता न चला ,


चांदनी इश्क वालो के ,संग होती है

सूरज कब ढल  गया , पता ना चला ,
इश्क से, इश्क करते है, इश्क वाले ही,
इश्क वालों को, अब तक पता न चला ,


मज़हबी ,बुज़दिल ,सियासते इश्क,करते है ,

इश्क मासूम  है उनको पता न  चला ,
जिंदा दिल ही, इश्क किया करते है
अच्छा है की मुर्दा दिल को, अब तक पता न चला ,


इश्क तो खुदा  की, इबादत पाक है ,

नापाक इश्क हो रहा है , पता न चला ,
इश्क में तो जान, दिया करते है , 
कत्ले इश्क करने वालो को, पता न चला ,

सहरदे मिल गई ,मज़हबी मिल गए ,

दुश्मनी दफ्न हो गई ,पता न चला ,
दूरियां घट गई , नजदीकियां बढ़ गई .
ये  नासमझों  को अब तक पता न चला ,

इश्क से अश्क है ,अश्क से इश्क है ,

खेल नज़रो का दोनों पता न चला 
इश्क़ और मुश्क दोनों छुपते नहीं  ,
दोनों दिखते  है सबको पता न चला ,







Wednesday, 13 February 2013

आप सभी को वसंत पंचमी माँ सरस्वती दिवस और मदनोत्सव
की बहोत बहोत शुभाकामना ....

या कुन्देन्दुतु  सार हार धवला ,
या  शुभ्र वस्त्राविता ,
या वीनावर्  दण्ड मण्डित करा ,
या श्वेत् पद्मासना ,
या ब्रम्हस्चुत शंकर प्रभितभिर ,
देवै सदा वन्दिता ,
सामंपातु सरस्वती भगवति ,
निःशेसजाड्य पहा ...........



Tuesday, 29 January 2013

motivational hindi poem badi soch dream big poem ,बड़ी सोच- कविता @sunilagrahari

   





       ...........  ............


सोचना जब भी तुम ,कुछ बड़ा सोचना , ......2 
खाली यूँ बैठने से कुछ होता  नहीं ,................2 
सपने जब देखना कुछ बड़ा देखना ,
छोटे सपनो से इन्सा बड़ा बनता  नहीं ,..........2 


गिरने के डर से तुम कभी उठते नहीं ,.............2 
इस तरह के ख्याल मन में( लाना नहीं ).........x 3 
गिरते  ही है सर सवार मैदान में ..................2 
मुर्दा दिल ख़ाक जीवन में जीते नहीं ,...........2 


( अपनी  हिम्मत से सांसों से लड़ते रहो 
एक  दिन अपनी मंजिल पे आ जाओगे )......2 
( हारना जीतना छोड़ कर तुम जियो 
जूनून दिल में न हो फतह मिलती नहीं ) .................२


 भीड़ में खुद को  ना तुम खो जाने दो ..............2

भीड़ में कोई आम ख़ास  ( होता नहीं .)..............x 3   ,
सोच कर कुछ नया कर चलो तुम बड़ा ,......2
मत जियो ऐसे जैसे कोई मकसद नहीं ,.........

badi soch hindi kavita , motivational song by sunil agrahari, big dream song , poem on big dream , preranatmak kavita in hindi 

Wednesday, 23 January 2013

hindi kavita geet ummeed उम्मीद रौशन की -सुनील अग्रहरि , poem for blind people feelings by sunil agrahari

 ये कविता एक अन्धे व्यक्ति के ज़ज़्बात हैं  ………। 


माँ को छु कर अहसास किया ,
सूरत है कैसी क्या जानूं 
अब मै  अपनी आँखों से ,
कायनात देखना चाहता हूँ .

काला रंग बहोत देख चुका ,
रात के  रंग को क्या जानू 
सतरंगी सपनो के रंग को 
आँखों  से छूना चाहता हूँ 

उंगली और छड़ी ने अब तक
लाज भरोसे की रखी
अब इनको आराम दे कर 
उजाले से दोस्ती चाहता हूँ 

जाने अन्जाने ठोकर से ,
हर रिश्ते को महसूस किया 
इक लम्हा मुझको भी सोचो 
प्यार आप का पाना चाह्ता हूँ 

Choti si asha hindi geet ,motivational poem by sunil agrahari .छोटी सी आशा - कविता सुनील अग्रहरि , motivational inspiring poem by sunil agrahari

  

Published  India delhi 

Magazine- Sarv bhasha 

छोटी सी आशा ,लेकर चले हम .

सूरज की किरणों सी आगे बढे हम ,.....2
सपने सजा कर ,चल तो दिए है 
उम्मीद की लौ ,रोशन दिये है ............../2
छोटी सी आशा ..............
                             music
हिम्मत न हारे चीटी के जैसे ,
मन अपना निर्मल नदियों के जैसे ......m /2
मस्त चाल अपनी हवाओं के जैसे ,......2
ऐसी तमन्ना लेकर चले है ............/......2
छोटी सी आशा ...........
                               music
ये हौसला तो अब न रुकेगा 
मुश्किल है राहे ,फिर भी बढेगा ......//2
ये काफ़िला  यूँ  चलता रहेगा ...2
सागर की लहरों पे पल कर जिये है .....................,/2
छोटी सी आशा ........
                             music
बाते  न कोरी हम यूँ ही करते 
हिम्मत लगन से हर काम करते ........m/2
बढ़ते चले हम ,पीछे न हटते .........2
वादे ज़माने से हमने  किये  है ........................../2
छोटी सी आशा .......... 

सुनिल अग्रहरि 

Monday, 21 January 2013

shakti roop hindi poem ,शक्ति रूप - कविता सुनील अग्रहरि - नारी शक्ति, poem for woman's by sunil agrahari


             


published in 
jankarikaal magazin march 21

 शक्ति रूप


ये नारी है कितनी न्यारी ,कभी माँ का रूप बन जाती है ,
और कभी राखी बन  कर   कलाई   पर    सज जाती है ,

जिस गोद में नानी दादी के ,बड़े हुवे हो तुम पल कर ,

ममता के उस आँचल को मैला न करो पंवा चल कर ,

नारी तुम केवल अबला नहीं ,तुम संसार की शक्ति हो ,

जीवन की उत्थान हो तुम ,तुम ही श्रद्धा भक्ति हो ,

देवों के देव महादेव ने ,अर्धनारीश्वर  अवतार लिया ,

नारी शक्ति है गाथा अनंत ,सारी  दुनिया को तार दिया ,

शर्म   नहीं आती  है  तुमको ,बर्ताव है जैसे    भेड़िया ,

बदनामी गले लगाते  हो , और अंजाम है हाथो में बेड़िया ,

अपने घर की नारी का जब ,अपमान तुम्हे बर्दाश्त नहीं ,

तो और  किसी नारी के अपमान का तुम्हें अधिकार नहीं ,

मत भूल नारी जग जगजननी है ,पुरुष है इसका मात्र अंश  ,

कन्या  वध करने  वाला   ,बच  न   पाया   बलशाली  कंस ,

समाज में जितना हक़ है तुम्हारा ,उतने हक़ स्त्री  के भी है ,

है वक्त अभी संभल जाओ ,,वरना हाथ महिलओं के भी है ,

शर्म  करो   और बंद करो  , स्त्री   पे अत्यचार को ,

इज्ज़त दो सम्मान करो ,नई उर्जा का संचार करो ,  

shakti roop poem 
poem on women's day , 





Thursday, 17 January 2013

motivational inspiring poem "Mai chala "मै चला - कविता सुनील अग्रहरि , by sunil agrahari

                       


मै चला ............................x 4

मै चला था अकेला सफ़र में कभी

लोग मिलते गए  ( कारवां बन गया )..........x 2
हंस के गैरों से भी हम तो मिलते गए
कैसे है नासमझ ,  (कुछ का दिल जल गया ).....x 2
मै चला ............................x 4

दुश्मनी  हमको तो करी आती नहीं

प्यार से सब का दिल जीत लेते है हम ..........2
( मुस्कुरा के कभी ,हमसे जो भी गया
हम गले मिलने से   (चूकते भी  नहीं ),....2 ).......2
मै चला ............................x 4

धोखा देना कभी हमने सीखा नहीं ,............2

वादा जो भी किया ,उसपे मर मिट गए ..........2
कर खुदा  का भरोसा, हम बढते गए
खेल जीत हार  से   (हम तो डरते नहीं )........2
मै चला ............................x 4


लेकर आये थे क्या ,ले कर जायेंगे क्या

अपने जीने का अंदाज़ ही रह जायेगा  ............2
 ( इसलिए कहता हूँ ऐ मेरे दोस्तों
 ये मुकद्दर का सिकंदर  ( कहलायेगा ) ,....2 )....2 
मै चला ............................x 4  

Thursday, 1 November 2012

bhookh hindi poem भूख -कविता सुनील अग्रहरि - hindi poem on hunger , greedy people by sunil agrahari

               


हर मुसीबत की जड़ है , भूख है इंसान की ,
तन की हो या मन की ,न बस की है भगवन की ,


जीतना दुनियां को सारे ,भूख अंग्रेजो की थी ,
देखते ही देखते वो , सारा देश खा गए ,
लालच की भूख ने ही, गद्दार पैदा किये ,
मुल्क के बदले में, हमें गुलामी दे गए ,


"वास्को " को भूख थी ,खोज नई दुनियां की ,
भूख की ज्वाला में ,वो अपना जूता ही खा गए ,
 जग पे बादशाहत की, भूख थी " नेपोलियन " को ,
वाटर लू की जंग में , वो मात ही तो खा गए ,


चारा पशुवो का हो या ,शहीदों का  कफ़न ,
पेड़ पर्वत खदान हो या विधवाओं का वेतन ,
ऐसे भी है नेता जिनकी भूख मिटती ही नहीं ,
खाते है एक सांस में सब ,मगर डकार लेते ही नहीं ,

भूख का रूप है ,ये घिनौनी कुरीतियाँ ,
बेटे की भूख में , मर रही बेटियां , 
जिस्म की भूख में ,रिश्ते मर मिट रहे ,
इन्सा खाने लगा, इन्सा की बोटियाँ 

BOLI BHAGWAN KI HINDI POEM - कविता सुनील अग्रहरि - POEM ON GOD hindi poem SUNIL AGRAHARI

      

                  

 तेरी गढ़ी इस दुनियां में ,तेरी भी बोली लगती  है ,
कैसी है ये दुनियां भगवान ,तुझे भी नहीं बख्शती है ,

नाम से तेरे दौलत मिलती ,सब को ऐसा लगता है ,

सबको अपने करम की मिलती ,कोई नहीं समझता है,

डर  के मारे भक्ती  और चढ़ावा दिखावा 
करते है ,
अपने आप को धोखा देते ,ढोंग को  बढ़ावा देते है ,

भूखे तन में  ईश्वर बसते ,
कृपण मूरत ये सस्ती है  ,
चंद पैसे में मिल सकती है ,पर ये तो न बिकती है ,

गरीब तन को ढकने से, 
भगवान् खुश हो जाते है    ,
ताने दे कर उसे भगाते ,अपमान उसका करते है ,

तेरे ऊपर तेरे जल को ,भर भर लोटे चढाते  है ,

प्यासे जन पक्षी और पेड़ को ,बूँद बूँद तरसाते है ,

धोखा देते अपने आप को , भ्रम भरोसा 
तुझ पर है  ,
काम गलत खुद करते ,फिर तुझको कोसा करते है ,

Poem for nature प्रकृति अपमान-कविता सुनील अग्रहरि - nature disrespect poem ,climate action by sunil agrahari



नदी पेड़ पर्वत में जब बसते , सब के भगवान हैं  ,
फिर क्यों  इनको मार रहे , ये कैसी शिक्षा ज्ञान है ,

शुद्ध हवा फल फूलदाईनी प्रकृति ये जीवनधारा है 
इनकी सेवा रक्षा  करना ये कर्तव्य हमारा है 

साँस की डोर हवा में बहती , इसका दम हम घोट रहे है 
प्रगति के नाम पे पल पल चलते 
प्रकृति का सीना छलनी करते चलाते तीर कमान ,

आलीशान महल में रहते "अली '' को हम भूल रहे है ,

पेड़ काटते  खोदते  धरती , करते हो माँ का अपमान ,

मिट्टी से तुम निकले थे ,मिट्टी में मिल जाओगे ,

आये थे  खली हाथ जहां में , खली  हाथ ही जाओगे ,

चैन से  सोया , खेला, कूदे ,जगह थी माँ गोदी ,

धरती माँ भी अपनी है , फिर उसकी आस क्यों खो दी ?  





Monday, 8 October 2012

बचपन का सिकंदर -कविता सुनील अग्रहरि , child labor poem

                    

इस को कविता अखिल भारतीय अणुव्रत संस्थान से प्रतियोगिता में प्रथम पुरष्कार प्राप्त हुवा है. 


 वक्त था सुबह का , मै जा रहा था स्कूल ,
 एक जिम्मेदार कन्धा देख , मै  गया ख़ुदा  को भूल ,
 वो बोझ था परिवार का , मर रहा था बचपन 
 जिम्मेदारी ढो  रहा था, उम्र हो जैसे पचपन ,
कंधे पे एक डंडा , लड्डू थे जिसपे लटके ,
दिनभर में शायद कोई खरीदता था भूले भटके ,
जीवन में जिसके फैली थी, चारों तरफ खट्टास
वो बेच रहा था बच्चों के बीच ,जीवन की मिठास ,

सुबह का नाश्ता ,क्या उसने किया होगा ?
 खली पेट पानी शायद रास्ते में पिया होगा ,
 भूखे पेट भूख को फिर ,उसने रौंदा होगा 
सूखे गले से फिर "लड्डू ले लो" बोला होगा,

  सोचा तो होगा उसने ,कभी स्कूल मै भी जाऊँ  
  संग सब के खेलू कूदूं ,संग सब के नाचूँ  गाऊँ  ,
  दूजे का खाना खाऊ और अपना टिफिन बांटे 
  मै भी करूँ शैतानी , मुझको भी टीचर डांटे ,

 बिताता है दिन जाने वो कैसे कैसे 
 बेच कर कुछ एक  लड्डू ,कमाए गा थोड़ा पैसे ,
घर पहुंचेगा शाम को  और माँ बनाएगी खाना ,
तब जायेगा उसके पेट में एक अन्न का दाना ,

जीवन की चूल्हा चक्की में खेल खो गया 
बचपन में तरुणाई का मेल हो गया ,
खिलौने  सी उम्र में खिलौना खो  गया 
रूठी थी  किस्मत उसकी  वो भूखे पेट सो गया ,
घर के हालात से वो मजबूर हो गया ,
शिक्षा के  मंदिर से वो दूर हो गया ,
परिवार पालने के खातिर सब से दूर हो गया ,


ये भी तो नेक काम है , मानवता और धर्मं का,
पर समाज नहीं समझता ,ये विषय है शर्म  का ,

क्या ओलम्पिक में जीत को ही सम्मान मिलना चाहिए ?
मेरी  समझ से इसको भी ईनाम मिलना चाहिए ,
लेकिन    ....... 
इसको समझने के लिए दिल में दीन ,धर्मं, ईमान ,चाहिए,
पर ये हो न सका .......और
बचपन का ये सिकंदर ,घायल हो गया ,
इस उम्र में उसकी हिम्मत का मै  कायल हो गया ..............
इस उम्र में उसकी हिम्मत का मै  कायल हो गया.............
इस उम्र में उसकी हिम्मत का मै  कायल हो गया...............

                                                                       सुनील अग्रहरि