Published in Mauritius
Magazine - Akrosh
February 18




गर्दीशी को निभाने तेरे, आया हूँ मैं ,










***अकेल ही **२०/१०/२०१५
क्यों ज़रूरी है किसी का होना ,आये जब दुनियाँ में अकेले ही ,दर्द में क्यूँ तू सहारा ढूँढे ,सहना जब दर्द को अकेले ही ,न कर इन्तज़ार काफ़िले का तू ,जब सफर मौत का अकेले ही ,ना मचा शोर ज़िन्दगी में कभी ,दफ्न ख़ामोश जब अकेले ही ,ऐ ख़ुदा तू बता संग किसके रहूँ ,साया बिन स्याह में जब अकेले ही ,
******कई बार ******९ /१०/२०१५
यूँ अँधेरे को ऐसे ना इल्ज़ाम दो ,लोग उजाले में भी तो भटक जाते है ,मुफलिसी पे ना तू ऐसे आंसू बहा ,दौलतमन्द भी भिखारी बहुत होते है ,कोस कर यूँ मुकद्दर को पायेगा क्या ,हौसले से मुकद्दर बदल जाते है ,दूसरों को ग़लत कह के खुद ना बचो ,खुदबखुद भी तो लोग बहक जाते है ,ये ज़रूरी नहीं अपनों में अपना हो ,कई बार ग़ैर भी अपने बन जाते है ,

